16 फैक्चर और 8 ऑपरेशन के बाद भी आईएएस बनीं उम्‍मुल

आईएएस उम्‍मुल खेर उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो कुछ सहूलियत न होने का रोना रोते हैं. गरीबी, हड्ड‍ियों की बीमारी, फ्रैंक्‍चर और ऑपरेशन झेलकर भी उम्‍मुल आईएएस बनी हैं.
राजस्थान के पाली की रहने वाली उम्मुल खेर कभी पढ़ने के लिए तो कभी अपने जीवन को बचाए रखने के लिए संघर्ष करती ही आई है. मूंगफली बेचने वाले पिता की बेटी और हड्डी रोग से ग्रस्त उम्मुल कभी झुग्गियों में तो कभी सड़क पर भी रहीं. इतना ही नहीं मां के मरने के बाद सौतली मां के जुल्म और आठवीं के बाद पढ़ाई न करने के फैसले ने उन्हें घर से अलग रहने पर मजबूर कर दिया.
2016 में पहले प्रयास में ही यूपीएससी में 420वां रैक पाने वाली उम्मुल 28 साल की उम्र में 16 बार फ्रैक्चर और 8 बार ऑपरेशन झेल चुकी हैं.2012 में हुए एक्सीडेंट में वह ऐसी घायल हुईं की व्हीलचेयर पर आ गईं थी. वह इससे घबराई नहीं बल्कि अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं.
2001 में झुग्गियों के टूटने के बाद उनका परिवार त्रिलोकपुरी में आ गया और वहा ट्यूशन पढ़ाने लगी जिसके उन्हें 50 रुपये मिलते थे .
2008 में अर्वाचीन स्कूल से 12वीं पास करने के बाद 2011 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन करना शुरू किया। जेएनयू से एमए की पढ़ाई के दौरान उन्हें मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप के तहत 2000 रुपए महीना मिलने लग गया और हॉस्टल में रहने की जगह भी। इसके बाद उम्मुल ने इंटरनेशनल रिलेशन में मास्टर्स डिग्री के लिए जेएनयू में अप्लाई किया।
इसी बीच 2012 में उनका एक्सीडेंट हुआ और उन्हें हास्पिटलाइज होना पड़ा और इसके कारण उनका ट्यूशन छूट गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जेएनयू के इंटरनेशनल स्टडीज स्कूल से पहले एमए किया और फिर इसी यूनिवर्सिटी में एमफिल/पीएचडी कोर्स में एडमिशन ले लिया. 2013 में उम्मुल जेआरएफ क्रैक किया. जिसके बाद उन्हें 25,000 रुपए प्रति महीना मिलने लगा. यहीं से एमफिल के बाद वो पीएचडी करने लगीं और इसी दौरान उन्होंने आईएएस भी क्रैक किया. उम्मुल को अब तक 16 फ्रैक्चर हो चुके हैं और 8 बार उनकी सर्जरी हो चुकी है. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी.