बच्चे के पीड़ित पिता

सरगुजा जिले में प्रशासन नाम बस दफ्तर के बोर्ड तक सीमित हो गया है!-सरगुजा जिले के दरिमा थाना क्षेत्र अन्तर्गत कक्षा 8वी के छात्र ने अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है परिजनो ने हत्या की आशंका जताई है। आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया है। आपको बता दे कि दरिमा के प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में मुकेश तिर्की उम्र 13 वर्ष सीतापुर थाना के अंतर्गत बिशनपुर गांव का छात्र था, जो बालक हॉस्टल में रहकर पिछले दो सालों से पढ़ाई कर रहा था। इधर परिजनों ने बच्चों की मौत के बाद न्याय की गुहार लगाई है। वही सहायक आयुक्त बताया कि पथरी की शिकायत की जानकारी मिली है जिसकी वजह से छात्र काफी परेशान था। फिर भी इस मामले की जांच दो सदस्यीय टीम के द्वारा की जाएगी। इधर पुलिस ने शव का पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया हैं। वही पुलिस भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।

इस तरह की बदहाल व्यवस्था पर अंदर ही अंदर कुछ भाजपाई ही कह रहे हैँ कि अधिकारी संवेदना खो चुके हैँ और हमारे विधायकों को आमजन की समस्या से कोई सरोकार है नहीं!

वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि रामराज की बात करने वाली भाजपा के राज में सरगुजा संभाग में तो प्रशासन नाम की कोई चीज ही नहीं बची है!एक मासूम की प्रतापपुर में हत्या हो गई,3 बच्चों ने आत्महत्या कर ली, विधायक का भाई थाने में घुसकर गाली गलोच कर रहा है लेकिन प्रशासन के कान में जू तक नहीं रेंग रही!”

सही भी है बुरी तरह कराहते सरगुजा में काम करने वाले और दमदार अधिकारियों की जरूरत है न कि अपने ऑफिस में बैठकर मीटिंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वालों की!

By @dmin

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