
“सैंय्या भए कोतवाल तो डर काहे का “ जी हाँ ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी और ये अंबिकापुर में चरितार्थ होते हुए भी दिख रही है ।
दरअसल कल अंबिकापुर के ब्रम्हपारा में एक सकरी गली में प्लास्टिक के नाम पर गोदाम बनाकर रखा गया था लेकिन यहाँ रिहायशी इलाक़े में घनी आबादी के बीच इस मकान में भारी मात्रा में अवैध तरीक़े से पटाखे का भंडारण करके भी रखा गया था।
इसके संचालक का नाम मुकेश अग्रवाल है जो कि शहर के बड़े कारोबारी के रूप में जाना जाता है।
मुकेश अग्रवाल ने पटाखों के व्यापार से होटल के व्यापार में भी पैर पसारा और रिंग रोड में आलीशान पर्पल आर्किड होटल के नाम पर सर्वसुविधा युक्त होटल शुरू किया।
पटाखों व प्लास्टिक के व्यापार के समय से ही ये युवा व्यवसायी कई पुलिस अधिकारियों से नज़दीकी संबंध बनाने का काम सफलतापूर्वक करते हुए अपना भौकाल दिखाना शुरू कर दिया।
सवाल ये है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी पुलिस ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की ये किसी के समझ में नहीं आ रहा है।
सूत्रों की मानें तो सरगुजा आई जी दीपक झा एवं सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत इस मामले में सख़्त कार्यवाही करने के मूड में हैं लेकिन मैदान पर मौजूद अमला इस कारोबारी के साथ खड़ा होते दिखने का कई प्रमाण दे चुका है।
आज हम पहल के माध्यम से कारोबारी मुकेश अग्रवाल की एक नहीं बल्कि एक साथ कई बड़े पुलिस अधिकारियों के साथ हंसते मुस्कुराते दोस्ताना अंदाज़ की फोटो सहित ये समाचार इसलिए दे रहे हैं कि आमजन समेत राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को भी व्यवसायी व इनके गठजोड़ की बात पता चल सके।
हालाँकि किसी के साथ फोटो होना ये तथ्य किसी गठजोड़ को बताने के लिए साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं हो सकता मगर ये तस्वीरें भी कई राज बयां कर जाती हैं ।
अंबिकापुर विधायक व मंत्री राजेश अग्रवाल पर पूर्व पुलिस अधिकारी प्रमोद पांडेय भी जमकर बरसे हैं साथ ही 85 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक अशोक शुक्ला ने कल अवैध रूप से रिहायशी इलाक़े में रखे पटाखे में भयंकर आग पर सरकार को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि ये सरकार की कमी है ।
अब मोहल्ले के लोग जो कल से इस भयावह घटना से आहत हैं वो विधायक राजेश अग्रवाल पर जमकर भड़क रहे हैं वहीं पिछले 5 महीने से तबियत ख़राब होने के कारण लगातार एक वरिष्ठ नागरिक अशोक शुक्ला जो बिस्तर पर हैं वो अपने जीवन में इस तरह की भयावह आग नहीं देखने की बात कह मोहल्ले में आसपास के लोगों का पुनर्जन्म मान रहे हैं।
साफ़ है कि एक बड़ी लापरवाही से लोग आहत हैं और इस पर अभी तक कोई कड़ी कार्यवाही नहीं होने से भी ।
अब देखना ये है कि पटाखा दुकान के संचालन करने वालों पर प्रशासन किस तरह से कानूनी शिकंजा कसता है ।
आलोक शुक्ल,संपादक पहल।
