अंबिकापुर पटाखा कारोबारी मुकेश अग्रवाल की कई पुलिस अधिकारी के साथ सामने आई तस्वीर। सवाल ये कि ये सब क्या प्रशासन के संरक्षण में चल रहा था? दूसरे दिन फिर भड़की आग।
“सैंय्या भए कोतवाल तो डर काहे का “ जी हाँ ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी और ये अंबिकापुर में चरितार्थ होते हुए भी दिख रही है ।दरअसल कल…

