ED की बड़ी कार्रवाई:

रिलायंस कम्युनिकेशंस बैंक फ्रॉड केस में ₹3034.90 करोड़ की संपत्ति अटैच

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले में ₹3034.90 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर दी हैं। इसके साथ ही अनिल अंबानी समूह (RAAG) से जुड़े मामलों में कुल अटैचमेंट की राशि ₹19,344 करोड़ से अधिक हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित SIT रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े मामलों की जांच कर रही है, जिनमें बैंक और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं।

ED ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 5 के तहत की है, ताकि संपत्तियों के दुरुपयोग को रोका जा सके और बैंकों व आम जनता के हितों की रक्षा हो सके।

किन शिकायतों पर शुरू हुई जांच?

यह जांच CBI द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुई थी। ये शिकायतें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा और LIC द्वारा दर्ज कराई गई थीं, जिनमें RCOM, अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ आरोप लगाए गए थे।
₹40,185 करोड़ का बकाया
जांच में सामने आया है कि RCOM और उसकी समूह कंपनियों ने घरेलू और विदेशी लेंडर्स से भारी कर्ज लिया था, जिसमें से करीब ₹40,185 करोड़ अब भी बकाया है।
किन संपत्तियों को किया गया अटैच?

ED की जांच में प्रमोटर ग्रुप की कई संपत्तियां सामने आईं जिनमें शामिल हैं:

मुंबई के उषा किरण बिल्डिंग में फ्लैट

पुणे के खंडाला में फार्महाउस
अहमदाबाद के साणंद में जमीन का टुकड़ा

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 7.71 करोड़ शेयर

ये शेयर राइज़ी इन्फिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के पास थे, जो अनिल अंबानी परिवार के राइज़E ट्रस्ट के तहत एक इकाई है।

क्या है RiseE ट्रस्ट ?

ED के अनुसार, RiseE ट्रस्ट का गठन संपत्तियों को एकत्र कर उन्हें अनिल अंबानी की व्यक्तिगत देनदारियों से बचाने के लिए किया गया था। आरोप है कि इन संपत्तियों का इस्तेमाल परिवार के हित में किया जाना था, जबकि बैंकों के कर्ज NPA में बदल चुके थे।

आगे क्या होगा?

PMLA की धारा 8 के तहत, जब्त संपत्तियां कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैध दावेदारों—यानी प्रभावित बैंकों—को लौटाई जा सकती हैं। इससे सार्वजनिक धन की वसूली संभव हो सकेगी।

ED ने कहा है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच करना है।
मामले में आगे की जांच जारी है।

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