

असम के पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान में एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री असम के ताकतवर प्रभावशाली नेता सर्वानंद सोनोवाल का यह पत्र सिर्फ असम में ही नहीं देश की राजधानी नई दिल्ली और प्रदेश के उन सभी राजधानी में जहां भाजपा की सरकार है उन राज्यों में तेजी से फैल रहा है।
2014 के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और भाजपा संगठन में भी बड़ा बदलाव आ गया है।
सवाल ये कि क्या अब भाजपा के संगठन और भाजपा पार्टी में नागपुर का दबाव है या नहीं? वहीं बात ये भी कि क्या भाजपा की मूल विचारधारा को ही तो विलोपित नहीं किया जा रहा है?
नागपुर को चाहिए कि जल्द से जल्द ठोस निर्णय लेवे और सामूहिक नेतृत्व के रूप में काम करने वाली टीम पर ध्यान दें जिससे मूल विचारधारा के भाजपाई पार्टी में अपने को उपेक्षित महसूस मत करें।
और तो और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस से भाजपा में आए एक पहली बार के विधायक को मंत्री बना दिया गया है जो भाजपा के मूल विचारधारा के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर जिस तरीके से हर काम में अपने लोगों को अहमियत दे रहे हैं उससे अंदर ही अंदर यहां भी भारी नाराज़गी दिख रही है जो आने वाले समय में भाजपा के लिए ही घातक साबित हो सकती है।
भाजपा को अब ये बात समझनी चाहिए कि दूसरी पार्टी से आए लोगों को हर जगह प्राथमिकता देना कहीं उसके लिए ही नासूर न बन जाए।
हालांकि हेमंत बिस्वा शर्मा का व्यक्तिगत जनाधार अच्छा है लेकिन पार्टी के मुख्य कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना ही उनकी लंबी पारी के लिए श्रेयस्कर होगा।
लेकिन इसके अगले दिन ही सर्वानंद सोनोवाल ने ट्वीट कर लिखा है कि ये फेक पत्र है इससे भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि इस पत्र के पीछे साजिश किसकी है?

आलोक शुक्ल, सम्पादक पहल।
