जनता का जननायक व् कांग्रेस की नयी आशा “जननायक अशोक गहलोत “

जैसा की हम सब जानते हैं की आज जिस तरह के राजनेतिक माहोल बन रहे हैं , हर पार्टी अपने आपको साबित करने मैं लगी हैं | कई नेता भी अपने आप को हर जगह सिद्ध करने मैं लगे हुए हैं | उसी कड़ी मैं एक नाम ऐसा भी हैं जो आज भी अपनी लोकप्रियता से जननायक हैं| उनकी लोकप्रियता के चर्चे पक्ष विपक्ष दोनों जगह हैं | हाल ही मैं हुए चुनावों के परिणाम की बात करे तो उनकी अपनी एक अलग ही कार्यशैली हैं |
हम बात कर रहे हैं कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत जो की गुजरात चुनाव मैं एक मुख्य नायक के रूप मै रहे हैं | जोधपुर राजस्थान के मूल निवासी जो दो बार राजस्थान प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उस कार्यकाल मे वो हमेशा जनता के जननायक रहे हैं |

कांग्रेस मैं अगर उनकी बात करे तो बचपन से ही उनकी विचारधारा सबको साथ लेकर चलने की रही हैं | छात्रसंघ चुनाव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उनका दबदबा रहा हैं | वे हमेशा से ही सबको साथ लेकर एक नयी दिशा की ओर चलने में रहे हैं | जब देश के प्रधानमंत्री पी वी नरसिंगा राव थे तो उनके कार्यकाल में स्वतंत्र राज्यमंत्री (टेक्सटाइल) के रूप मे रहे , राजीव गाँधी के समय स्वतंत्र प्रभार खेल मंत्री व् इंदिरा गाँधी के समय स्वतंत्र राज्य परिवहन मंत्री के रूप मे रहे |

पार्टी में अगर उनकी लोकप्रियता की बात की जाये तो आलाकमान सोनिया गाँधी , राष्ट्रिय अद्यक्ष राहुल गाँधी व् कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा के सबसे करीबी मने जाते हैं | गुजरात चुनाव व् कर्नाटक चुनाव की बात करे तो कांगेस पार्टी के लिए उनका कार्य संजीवनी बूंटी के रूप में रहा हैं | उनकी चाणक्य निति व् राजनीतिक विश्लेषण से कर्नाटक में विपक्ष को कमजोर करके सरकार बनायीं हैं |

अगर आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के पास प्रधानमंत्री का दावेदार हैं तो निःसंकोच अशोक गहलोत एक सुद्रढ़ दावेदार हैं | उनका राजनेतिक विश्लेषण व् सामाजिक सरोकार दोनों ही दमदार हैं | भविष्य मे क्या होना वो तो गर्त में हैं पर अगर जननायक व् कुशल नेतृत्व के रूप मे देखे तो अशोक गहलोत प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं |

उनकी सरलता का कोई सानी नही वे जनता के बीच कभी भी फूलों की माला पहनते हुए भी देखे जाएंगे , वे आज भी सूत के माला स्वीकारते है , “अशोक नहीं आंधी है मारवाड़ का गांधी है” जैसे नारे उनके लिए बहुत प्रचलित है , उन्हें लोग प्रेम से जादूगर भी कहते है , राजस्थान में विकास के नए आयाम उनके कार्यकाल में तय हुए थे , जहाँ एक और कांग्रेस पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार में लिप्त से हो चुकी है उसमें कांग्रेस में एक ऐसा नाम ऐसा भी है जिसपे अभी तक किसी प्रकार का कोई भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है , कर्णाटक चुनाव में मिली जीत के भी सूत्रधार वे ही माने जा रहे है , उनका विधायकों के साथ समन्वय ने नही भाजपा सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया , पूर्व में चाहे सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का राज्यसभा चुनाव हो चाहे गुजरात विधानसभा चुनाव , ये अशोक गहलोत थे जिन्होंने भाजपा को नाकों चने चबवा दिए थे , मुख्य धारा के सभी मीडिया चैनल तथा प्रिंट मीडिया में उनके द्वारा कांग्रेस को वापिस खड़े करने के उल्लेख देखे जा रहे है , वे हर चित्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ भी कई स्थानों पर उपस्थिति दर्ज करवाते हुए दिख रहे है , जैसा कि पूर्व में भी हुआ कि सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद पर प्रधानमंत्री पद को त्यागते हुए मनमोहन सिंह जो प्रधानमंत्री बनाया था कयास लगाए जा रहे है कि राहुल गांधी में चुनाव पूर्व ऐसा ही कुछ कर अशोक गहलोत को सिरमौर बना प्रधानमंत्री पद पर पदस्थापित कर सकते है ।
वैसे भी राजनीति कयासों का खेल है और यह कयास इतेफाक से सच्चाई में बदलने में ज्यादा समय नहीं लेगी ।

कुछ ऐसे विडियो भी है जो इनकी लोकप्रियता को दर्शाता है